मसूरी/ देहरादून । भूखा तीसा लड़ी-लड़ै ,खायीं पुलीस की गोळी सोटी
बैरियोंन उड़ै मजाक , तुम्तैं मिली जेल कि रोटी ।

अर्थात जिन लोगों ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण का आन्दोलन लड़ा उनका राज्य विरोधियों ने ख़ूब मजाक उड़ाया, आन्दोलनकारी जनता ने उत्पीडन सहा, जेल गए, मगर हुआ क्या उनकी व्यथा तो न सिर्फ आज भी जस की तस बनी हुई है बल्कि अधिक भयाभव हो गई है। पहाड़ी राज्य की भावनाओं, उद्देश्यों, भाषा, लोक संस्कृति, पहचान का तो रोज खून हो रहा है। अच्छे स्वास्थ्य और शिक्षा की मजबूरी ने पहाड़ के मकानों पर ताले लगा दिए हैं। गाॅव में बचे लोग जंगली जानवरों का शिकार बन रहे हैं । ये सब लाइनें हैं कल रविवार को यूट्यूब पर रिलीज हुए गढ़वाली गीत ‘उत्तराखण्ड बचौंण’ की । यह गीत रातों रात सोशियल मीडिया के सभी पलेटफार्म पर छा गया है । राज्य की पीड़ा को उजागर हुए गीत के समर्थन में लोगों के जर्बदस्त कमेंट्स आ रहे हैं साथ ही गीत को शेयर किया जा रहा है । 4 बड़ी आन्तराओं वाले इस जनगीत में मठ मंदिरों की भूमि को मदिरालय भूमि बनाने जानें पर भी कड़ा प्रहार किया गया है । लिंक किलिक कर देखें पूरा गीत –


गीत की एक अन्य लाइन ‘चुला फुंडा का उंडा फुंडा, उंडा फुंडा का राज्याधारी ह्वेगैनी’ से राज्य की 25 साल की व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया गया है । गढ़वाली में लिखी इस लाइन का अर्थ है कि राज्य की लड़ाई लड़ने वाले मूल लोग तो बाहर हो गए हैं और दूसरे लोग आज राज्य के कर्ताधर्ता बन बैठे हैं । यह भी गौरतलब कि राज्य आन्दोलन के 30 साल बाद कोई जनजागृति वाला अब यह जनगीत आया है । जो राज्य हितों के लिए संघर्षरत संगठनों और व्यक्तियों को एक नई ऊर्जा देने का कार्य करेगा।
गीत को लिखा है गीतकार एवं उत्तराखण्डी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक प्रदीप भण्डारी ने। गीत को गाया है वरिष्ठ लोकगायक विरेन्द्र डंगवाल ने। गीत पर उत्तराखण्डी फिल्मों के सुपरस्टार और सर्वाधिक हिट गढ़वाली फिल्म ‘घरजवें’ के नायक बलराज नेगी और प्रदीप भण्डारी ने शानदार अभिनय किया है। गीत को संगीतबद्ध किया है गणेश चंद ने तथा गीत को खूबसूरत फोटोग्राफी से सजाया है प्रसिद्ध सिनेमोटोग्राफर नागेन्द्र प्रसाद ने।
गीत रिलीज अवसर पर लेखक निर्देशक प्रदीप भण्डारी ने कहा कि वे एक जिम्मेदार रचनाधर्मी तथा राज्य निर्माण आन्दोलनकारी हैं। राज्य की भोली भाली जनता की उपेक्षा तथा राज्य की आत्मा को मरते हुए नहीं देख सकते । वे भ्रष्ट नेताओं की पोल पट्टी खोलने और जनता को जागरूक करने के लिए इस प्रकार के गीत बनाते रहेंगे । शीघ्र ही गीत का दूसरा भाग भी बनेगा ।

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