दोस्तों आज गढ़वाली गीत संगीत और यूं कहूं कि उत्तराखण्डी गीत संगीत जगत केवल देश में ही नही विदेश में भी झण्डे गाड रहा है । आज यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम तक में एक से बढ़कर एक फनकार तुफान माचा रही है । नई नई प्रतिभाएं आप हमें रोज देखने को मिल रही हैं । आज हमें कई गायकों को नाम के आगे पीछे भांति भांति के अलंकरण चिपाकाए हुए देखने को मिल रहे हैं । कोई स्वयं को स्वर सम्राट तो, कोई अलां सम्राट फलां सम्राट से नवाज रहा है या उसके मित्र नवाजते रहे हैं । परन्तु मेरी इस बात से बहुत से लोग सहमत होंगे कि अगर 1970 के दशक में इस केदारखण्ड के संगीत असमान पर नरेन्द्र सिंह नेगी नरू भै जैसा सितारा उदय न होता तो शायद आज पहाड़ में गीतों की जो फसल लहला रही है वह न होती। अपने गीत बीजों और कम्पोजीशन से श्री नरू ने जो फसल उत्तराखण्ड के सूखे गीत संगीत खेतों में उगाई है उससे न सिर्फ गीत संगीत को आक्सीजन प्राप्त हुई बल्कि वे स्वांसे कालजयी हो गई हैं। जीवन का कौन सा रंग होगा जो श्री नेगी ने अपने गीत माला में फूल रूपी स्वरों में न पिरोया हो ।
दोस्तों आज सैकड़ों गीत संगीत प्रतियोगिताओं में प्रतियोगियों द्वारा श्री नेगी के ही गीत सर्वाधिक गाए जाते हैं । फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर नए गायक गायिकओं की जो फौज नज़र आती है वे सभी सर्वाधिक गीत श्री नेगी के ही गाए गाते हैं । लगभग 5 दशक से श्री नेगी ही ऐसे अकेले पहाड़ के हीरो हैं जिनकी मांग देश विदेश के हर एक सांस्कृतिक आयोजन, सम्मान समारोह, यी मीडिया चैनलों पर होती है । आम से लेकर सूट बूट वाले सभी लोग स्वयं को नेगी जी का सबसे बड़ा फैन बताते नहीं थकते । नेगी जी के लिए कुछ भी करेगा की स्थिति में रहता है । मगर मित्रों आपको पता है उत्तराखण्ड की इस महान धरोहर पर एक बार ऐसा भी भीषण संकट आया था जब बडत्रे बडे कलाकारों समेत बडे बडे फलावर्स ने इन्हें संकट के मूॅह पर अकेला छोड़कर किनारा कर दिया था । हालात यहाॅ तक पंहुच गए कि लोकतत्व की इस धमनी की साया से भी लोग भागने लगे थे । कहावत है न कि जब जहाज डूबता है तब सबसे पहले चूहे भगते हैं । यह कहावत श्री नेगी के लिए पूरी तरह फिट बैठती दिखायी दी ।
जी हाॅ दोस्तों गढ़रत्न के अलंकार से अलंकृत श्री नेगी के साथ एक वक्त ऐसा बुरा समय भी आया जो शायद इतिहास में कभी किसी लोकगायक के साथ नहीं आया होगा ।
