दोस्तों, उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा गाए गए गीत नौछमी नारेणा गीत, जो गीत उत्तराखंड की राजनीति में जलजला ले आया था,  यहां तक वर्ष 2007 में कांग्रेस सरकार के जाने का कारण भी वही गीत माना जाता है । आज वर्ष 2026 में जनवरी में उस गीत को आए पूरे 20 साल हो गए हैं। 20 साल हो गए मगर ऐसा लगता है जैसे 20 दिन ही हुए हों। क्योंकि ऐसा कोई वर्षए ऐसा कोई माह नहीं रहा होगा जब किसी न किसी वजह से इस गीत की चर्चा नहीं होती होगी। तो लीजिए 20 सालों के इस गीत की याद ताजा कीजिए और इस गीत के लिए जो मसूरी में सबसे बड़ा जन आंदोलन हुआ लोगों ने जो आंदोलन किया नेगी जी के पक्षए राज्य आन्दोलन की तर्ज पर हुए जिस टर्निग आन्दोलन से नेगी जी की पुनः मंच पर वापसी हुई और एतिहास के लिहाज से जिस घटना की जानाकरी हमारी आने वाली पीढ़ी को होनी चाहिए में उस गीत आन्दोलन पूरी कहानी बताउंगा कि किस प्रकार नौछमी नारेणा गीत पर घिरे थे गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी, आज इस गीत का जिन्न 20 साल का हो गया है।  मगर उससे पहले की बुनियाद का प्रमुख पहलु जानिए ।  नमस्कार मैं प्रदीप भंडारी । देखें पूरे आंदोलन की कहानी बताता वीडियो –

 दोस्तों,  24 सितंबर 2006 को मेरे संपादन में एक समाचार छपा, जिस समाचार पत्र में छपा उसका नााम था मसूरी गाइड’ और जिसे लिखा था हमारे उत्तराखंड की वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र सेमवाल जी ने । समाचार को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था वो भी सभी को पता है मगर अब उसका जिक्र करना यहां पर उचित नहीं है। लेकिन उस समाचार को पढ़ने से पहले आप सभी को यह भी बताना जरूरी है कि श्री सेमवाल माल तब भी एक बड़े दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार थे। मगर उन्हें मेरे अखबार में क्यों समाचार लिखना पड़ा, तो बता दूं कि उसका कारण था उस समय इतनी दहशत थी कि उन दिनों किसी भी समाचार पत्र में श्री नेगी के बारे में दो लाइनें नहीं छपती थी । सरकार और समाचार पत्र समाचार पत्र और संकट राजा ने कारण है कि नौछ नारायण गीत सरकार के खिलाफ था और सूचना मंत्री थी इंदिरा हृदेश यह भी बताता हूं कि तब फेसबुक या यूट्यूब आदि का जमाना नहीं था। यानी कि बात रखने के लिए केवल समाचार पत्र ही प्रमुख मंच था। और यह भी बता दूं दोस्तों कि जब जब भी इस देश में प्रदेश में विदेश में संसार में क्रांतियां हुई है जब भी कोई नया समाचार रस उद्घाटन जो बोलते हम कहते हैं या बहुत ही कोई नई सननीखेज समाचार जो लाता है वो साप्ताहिक छोटे पत्र ही लाते हैं। फिर वो धीरे.धीरे राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय अखबारों की हेडलाइन बनती है। तो आइए सबसे पहले उस समाचार की लाइनें पढ़ता हूं जो उस समय 24 सितंबर को 2006 को छपा था। तो दोस्तों उस समाचार जो पत्र था उसका जो हिडिंग था वो था नौछमी नारायण का कोप प्रकोप जो मेरे संपादन में अखबार था मसूरी गै उसमें छपा हर कोई छापने को तैयार नहीं था तो शेंद्र सेवाल जी और मैं हमारी मसूरी प्रेस क्लब काय में बैठे हुए थे और सेमाल जी ने मुझे कहा कि भाई आप तो एक रंगक भी हैं कलाकार भी हैं फिल्मकार भी और आपके होते हुए हमारे गण रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी की परीक्षा हो रही है। अपमान हो रहा है। आप चुप बैठे हैं। मैंने कहा क्या हैघ् तो इतना पता मुझे भी नहीं था कि वहां क्या चल रहा था। तो उन्होंने बहुत सारी बातें मुझे बताई। तो मैंने कहा चलिए आप समाचार लिखिए और मैं छापूंगा। देखा मैं लिख दूंगा लेकिन छप जाएगा। मैंने कहा मैं छापू और कुछ ऊपर वाले ने ऐसी हिम्मत आ दे रखी है कि सच्चाई को छापने में, सच्चाई को सही बोलने में अपुन का भी पीछा नहीं। तो साहब उसका हेडिंग था नौछमी नारायण का को प्रकोप उत्सवों की बयार कालजई रचनाकार नेगी की आवाज से मेहरूम रहेंगे श्रोता तो दोस्तों ये समाचार था गीतकार संगीतकार लीजेंड नरेंद्र सिंह नेगी को नौछमी नारायण के रूप में बेलगाम सत्ता से टकराना हर तरह से महंगा पड़ा है। नौछमी नारायणणा यानी प्रदेश के मुखिया की सत्ता की ताकत के खत्म होने को अब महज कुछ समय ही शेष है। लेकिन लेकिन उत्तराखंड मेरी लाश पर बनेगा कि हुंकार बनने वाले नौछमी नारायण के कोप प्रकोप के डर से लोग नरेंद्र सिंह नेगी की छाया के पास भी आने से डरने लगे हैं। अक्टूबर का महीना आने वाला है। अगले कुछ महीनों तक पूरे उत्तरांचल में तब हमारे प्रदेश का नाम उत्तरांचल था। 2007 से उत्तराखंड हुआ। पूरे उत्तरांचल में शदोत्सव सांस्कृतिक उत्सवों की बयार बहेगी। लेकिन लोक लोकगीतों की इस बयार में नरेंद्र सिंह नेगी की लोकगीतों को की महक नहीं होगी। कहीं नौ छमी नारायण नहीं सुनाई देगा। प्रदेश के मुखिया नारायण दत्त तिवारी के इस अघोषित आपातकाल ने लाखों करोड़ों उत्तरांचलियों की आंखों के सामने ही उनके लोकप्रिय लोक गायक को आज सत्ता से टकराने के लिए अकेला छोड़ दिया है। यहां तक कि उत्तराखंड राज्य के लिए संघर्ष करने वाले लाखों की भीड़ रूपी कथित कथित कथित उत्तराखंड आंदोलनकारी भी आंदोलन में जान भोगने वाले काल जई जनगीत रचने वाले नरू भाई के साथ नहीं है उठा जागा उत्तराखंड सो उठाणो भगत किसने कहा था न बोला भ बंधु तुम ते कनो उत्तराखंड चू किसने गाया थाघ् नरेंद्र सिंह जी ने प्रभात त्रिका तो वो कह रहे हैं कि भाई जो जो राज्य आंदोलनकारी अपने आप को कहते हैं और जो प्रमुख आलोकारी अपनी नौकरी की परवाह किए बगैर जिस व्यक्ति ने गीत गाए हैं उसका साथ तो उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कहने वाले तथा कथित लोग उनका साथ नहीं दे रहे हैं। बकल नरेंद्र सिंह नेगी मौजूदा समय में सरकारी अनुदान पर चलने वाले आयोजनों में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करने के एक भी आमंत्रण उनके पास नहीं है। यही नहीं जिन स्थानों पर उनके कार्यक्रम प्रस्तावित थे वहां के आयोजकों ने भी उनके कार्यक्रम कराने में असमर्थता व्यक्त कर दी है। तानाशाही शासन ने ऐसा करके संस्कृति प्रयोगों के मुंह पर तमाचा मारा है। कर्णप्रयागए चमोरी आदि स्थानों पर नेगी के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। आगामी 11 से 20 अक्टूबर से मसूरी में होने वाले शदोत्सव में भी नरेंद्र सिंह नेगी के कार्यक्रमों को शामिल नहीं किया गया है। पूरे उत्तराखंड में जहांजहां भी नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस बैकग्राउंड के अध्यक्ष काबिज हैं। वहां वहां पर नररू भाई नुकसान में है। जिस जगह अन्य पार्टियों से संबंधित अध्यक्ष हैं वो भी इसलिए घबराए हुए हैं कि कहीं सरकारी अनुदान से वंचित ना रह जाए। अब शासन प्रशासन का प्रकोप ना भाजना पड़ जाए। लेंसडाउन के विधायक हरक सिंह रावत ने लेंस डाउन ग लेंस डाउन ग्रीष्मोत्सव के लिए पहले तो नरेंद्र सिंह नेगी के कार्यक्रम का समर्थन किया लेकिन बाद में पीछे हट गए। पौड़ी के नगर पालिका अध्यक्ष व नगर कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने कुछ बहादुरी दिखाते हुए इस वर्ष ग्रीष्म महोत्सव में नेगी जी के कार्यक्रम तो करवा दिया लेकिन इस बात को लेकर वहां के कांग्रेसियों ने उनको निशाने पर ले लिया। एक लोक गायक ने तो अब इसमें क्या है कि बहुत सारे लोगों की बहुत सारी बातें हुई। भी बहुत सारे प्रकरण है जिनके हम अभी बात करने का आज जरूरत भी नहीं है। अब तो समय होता है तो बहुत सारी घटनाएं घटी। फिर आपको पता होगा किस में नेगी जी के पुतले भी फूंके गए। काफी घटनाएं पूरे प्रदेश में चलती रही। का जगह.जगह विरोध चलता रहा। ये होता रहा। ये सब बातें होती रही। अब आते हैं दोस्तों जो मसूरी ने जो बहुत बड़ी ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी और नरेंद्र सिंह नेगी जी को पुनः मंच पर उनका पुनः आगमन किया। बहुत बड़ी लड़ाई है और बहुत बड़ी रोचक कहानी है। बहुत मजेदार कहानी है। अभी तो खैर हमें इसको सुनाने में आनंद आ रहा है। लेकिन उस समय हम बहुत दहशत में थे। बहुत तकलीफ में थे। बहुत डर के खौफ में थे। क्या.क्या हुआ उतनी बातें तो हम बता भी नहीं पाएंगे। लेकिन जितना हो सकता है मैं बताता हूं। तो दोस्तों ये बात है 16 अक्टूबर 2006 की जब श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी को देहरादून में विरासत के मंच से बैरंग लौटा दिया गया और उन्हें प्रोग्राम के लिए बुलाया गया। लेकिन ये कहा गया कि भाई आपका प्रोग्राम नहीं हो सकता। तो इसके पीछे कारण यही माना गया था कि उस समय की सरकार ने जो है जो आयोजक थे री संस्था सहित उनप एक दबाव डाला कि भैया नर सिंह नेगी तो खिलाफ गा रहा है इसलिए उनको आप मंच कैसे दे रहे हैं उनको मंच दे देंगे तो नेगी जी पूरी टीम के साथ अपनी विरासत में आते हैं विरासत के मंच से पहले ही उन्हें आयोजक रोक लेते हैं एक होल बिठा देते हैं और कहते हैं भाई आप वापस आइए आपका प्रोग्राम नहीं हो सकता ये घटना घटी खैर मुझे नहीं पता ये घटना कब घटी उस दिन करीबन शाम 6 बजे के आसपास मुझे मेरे मित्र और हमारी फिल्म कैमाना की प्रोडयूसर्स राजेंद्र सिंह रावत जी का फोन आता है कि भंडारी जी आप क्या कर रहे हैंघ् मैंने कहा क्या करना है, मैं तो अपना दिल्ली का लिखने वाले काम कर रहा हूं। नहीं नेगी जी का अपमान हो गया। आप क्या कर रहे हैं, मैंने कहा नेगी जी क्या बात क्या हमारे लोक गायक नरेंद्र नेगी जी को तो विरासत से बड़े बेइज्जत करके उनको वापस भेज दिया गया। ये तो नेगी का नहीं पूरे पहाड़ का अपमान हो गया और नेगी जी हमारी आन बान शान है और आप चुप बैठे हुए हैं। मैंने कहा भाई कहां क्या हुआ, हमें तो कुछ पता ही नहीं है। यदि कुछ ऐसा हुआ है तो आप लोगों ने कुछ क्यों नहीं किया अरे यार हम क्या करते और भाई आप कुछ करो यार ये तो बहुत बहुत ही ज्यादा तकलीफ दे बात है। क्या होगाघ् अच्छा मैंने कहा तुम फोन रोको। उन दिनों तो वो नंबर वाले फोन होते थे। तो मैंने फोन उठाया और नेगी जी को फोन लगाया। नेगी जी को फोन लगाया तो नेगी जी ने फोन उठाया तो मैंने कहा नहीं जी कहां पर होघ् कहते हैं मैं तो तीन धारा पहुंच गया हूं। मैंने कहा अच्छा जी तीन धारा पहुंच गई है तो ठीक है मैंने कहा ये बताइए जी कि आज विरासत में क्या क्या हुआ और क्या सचमुच आपको जो है बंद किया गया सचमुच आपको बैरंग वापस लौटा दिया गया कि हां भंडारी जी वाकई जो है उन्होंने हमें तो भाई हम तो मना कर लिया कि तू प्रोग्राम दे सकता है तो मैंने कहा आपने क्या किया मैंने किया मैं तो वापस थोड़ी जा रहा हूं मैंने कहा इतनी बड़ी बात हो गई है क्या मजाक है ये इतना ज्यादा अपमान क्या है है ये क्या आप चुपचाप कैसे निकल गए यार बल्ब में किया तो मैंने जी अब आप चुप बैठो मैं कुछ करता हूं। ठीक है। अरे बस तुम उनके देख लेना। चलो ठीक है। साहब मेरी खोपड़ी घूमी। हमने तो उत्तराखंड राज्य आंदोलन लड़ा है। हमारे सामने जुलूस पे गोलियां चली है। जेल ख्संगीत, में रहे हैं। खून आग बगुला हो गया और मैंने उसी टाइम फोन उठाया। फोन लगाया और मेरा क्योंकि मेरेबहुत सारे मित्र हैं। प्रेस के साथी रहे हैं। प्रेस का मेंबर भी रहा हूं मैं। अध्यक्ष भी रहा हूं। मैं तो बहुत मित्र है मेरे। तो मैंने फोन उठाया शायद उस समय देवेंद्र सतीश जी जांग में थे और शायद जितेंद्र जी हमारे में थे उनको फोन मैंने लगाया मैंने कहा भाई बात सुनिए यहां पे तो ऐसी बात हो गई नेगी जी का अपमान हो गया विरासत से उनको तो बरंग लौटा दिया गया है वहां पे मैंने कहा नहीं जी कैसे बात कर रहे हैं ऐसी कोई घटना नहीं मैंने कहा जी पता कीजिए आप कि आपने नेगी जी से बात की मैंने कहा हमने निगेश जी से बात की फिर उन लोगों ने जो है नेगी जी को फोन किया होगा संपर्क किया होगा तो उनको फोन आया फिर क्या कर रहे हैं मैंने कहा जी देखिए ये तो बहुत बड़ा अपमान है कमाल है हमारे हमारे लोक गायनी हमारे गरत्न नेगी जी का अपमान हो गया है और हम उत्तराखंडी हमारी धरती पे हम चुप बैठेंगे हम तो चुप नहीं बैठेंगे मैंने कहा मैं तो चुप नहीं बैठूंगा मैंने कहा मैं इस अपमान के विरोध में कल सुबह मसूरी कचहरी पे धरने पे बैठने जा रहा हूं तो उन्होंने कहा पक्का मैंने कहा जी पक्का अब सुबह 7 बजे अखबार आते थे और अच्छा मुझे पता था कि न्यूज़ आए ना आए अब जो है मुझे तो धरने बैठना ही पड़ेगा हां तो मेरा तो हमेशा रहा है भैया ऐसी लड़ाई में कौन साथ आता है कौन आगे आता है आज की दुनिया में कोई नहीं आता है तो मुझे पता था कि मैं तो हमेशा ऐसे सत्य की आवाज उठाता हूं और अकेला पड़ जाता हूं तो मैंने कहा अकेले जाना है तो मैंने एक अपना द उठाई और चल दिया मसूरी कचहरी धाने पे 10 बजे के आसपास और मैंने कचहरी के बिल्कुल कचहरी एचडीएम ऑफिस के ठीक सामने आज जो जगह वहां पर है वहां पर मैंने अपनी दरी बिछाई और बैठ गया अपने आप धाने पे अखबार देखिए अखबार न्यूज़ लगी थी कि नंद सिंकी जी का अपमान और फिल्मकार प्रदीप नारे बैठेंगे इस अपमान के खिलाफ धरने पर फिर और जोश आ गया अब तो न्यूज़ छप गई साहबए  कौन साथ आता है कौन आगे आता है आज की दुनिया में कोई नहीं आता है तो मुझे पता था कि मैं तो हमेशा ऐसे सत्य की आवाज उठाता हूं और अकेला पड़ जाता हूं तो मैंने कहा अकेले जाना है तो मैंने एक अपना द उठाई और चल दिया मसूरी कचहरी धाने पे 10 बजे के आसपास और मैंने कचहरी के बिल्कुल कचहरी एचडीएम ऑफिस के ठीक सामने आज जो जगह वहां पर है वहां पर मैंने अपनी दरी बिछाई और बैठ गया अपने आप धाने पे अखबार देखिए अखबार न्यूज़ लगी थी कि नंद सिंकी जी का अपमान और फिल्मकार प्रदीप नारे बैठेंगे इस अपमान के खिलाफ धरने पर फिर और जोश आ गया अब तो न्यूज़ छप गई साहब चार लोगों को पता भी है तो साहब हम बैठ गए धरने पे मुझे पता था अकेले बैठना पड़ेगा शाम तक क्या दो चार पत्रकार साथी आ गए न्यूज़ चल लेकिन साहब बड़ा ताज्जुब हुआ बड़ा कमाल हो गया बड़ा कमाल हो गया कमाल क्या हुआ कि एक आदमी आया दो आदमी आया तीन आदमी आया चार पांच  दो सो, पांच सौ से लेकर पूरे ढाई हजार लोग मेरे धरने में और साहब मेरा तो फिर क्या था और सीना चौड़ा हो गया तो धरने में देखा जाएगा सरकार आए पुलिस आई देखा जाएगा तो लोग काफी आ गए और साहब बड़ी बड़ी दिलचस्प बात ये थी कि उन लोगों में सर्वाधिक लोग कांग्रेस के थे । और बाकी सारे दलों के लोग भी थे। भाजपा यूकेडी और हमारे बमबंथी लोग तमाम लोग वहां पर पहुंच गए। सामाजिक लोग पहुंच गए। बहुत लोग पहुंच गए। अब पहुंच गए साहब तो वहां पर तो बड़ा जश्न हो गया और मेरे मित्र थे। हमारे पत्रकार साथ थे। आज भी एमओस में सुनील सिलवाल जी तब ईटीवी हुआ करता था। वो आ गए। उन्होंने लाइव चलाना शुरू कर दिया जी वहां से। लाइव तो क्या होता था लाइव कुछ क्षण बाद लेकिन उसी समय आता था लाइव चला गया साहब सारे उन्होंने जो है न्यू बनानी शुरू कर दी और सीधा लाइव आ गया शायद ऑडियो में घर में बैठे हुए नेगी जी ने भी उस नजारा देखा और नजारा देखा तो मुझे फोन आया नेगी जी का वहीं पर दो बजे के आसपास की बात होगी भण्डारी जी धन्यवाद । आपने तो ये कमाल कर दिया। भाभी जी ने  भी मेरे से बात की । बहुत ही खराब स्थिति क्या बताऊंए बहुत ही निराशा में थे । तो जब कहीं से आस की किरण दिखती है कोई बंद अंधेरे कमरे में होगा और कहीं से किरण निकल आएगी तो लगेगा हां उम्मीद ही किरण तो साहब उन्होंने हमारा धन्यवाद किया ण् हमारा भी हौसला बढ़ गया और हमने तो उस दिन वहां बहुत भयंकर नारे लगे सरकार के खिलाफ नारे लगे नेगी जी के साथ अन्याय के खिलाफ नारे लगे होते होते साहब क्या हुआ कि हमें भी जोश चढ़ गया हमने जी कहा नेगी जी अब तो भाई ऐसा है कि सरकार ने आपके सारे प्रोग्राम कैंसिल किया ना अब हम आपका प्रोग्राम मसरी में करेंगे और मसरी में करेंगे और जो है आप यश कीजिए आपको आना है और क्योंकि 17 अक्टूबर थी और आने वाला था हमारा राज्य स्थापना दिवस 9 नवंबर तो हमने उनसे कहा कि आप 9 नवंबर को मुस्लिम में आएंगे हम प्रोग्राम कर रहे हैं आपका है ना उन्होंने कहा यार एक बात सुनो ये नवंबर तो भंडारी जी की मालूम की 9 तारीख असल में मेरे प्रोग्राम का ऑल हमें याद नहीं कहा बताया उन्होंने अर वालों ने कैंसिल हो जाना मुझे मालूम है कि वो कैंसिल हो जाएगा लेकिन फिर भी जो है मैं उस 9 तारीख की डेट मैंने कहीं दे रखी है मैं आपको 9 तारीख की डेट नहीं दे सकता फिर क्या होगा हमने कहा जी हम पूरे संध्या में रखते हैं फिर कि आप ऐसे कर लीजिए तो तय हो गया आठ नौ नवंबर 2006 को नरेंद्र सिंह नेगी लाइट की मसूरी में घोषणा हो गई। सारे टीवी चैनलों पे सारे न्यूज़ चैनल पे हो गई और हमने लगे हाथ जोश जोश जोश में आकर के कहा कि अभी जो उत्पीड़न नेगी जी का हो रहा जो उसके खिलाफ रीच रीच संस्था और प्रदेश सरकार का पुतला फूंका जाएगा। तिवारी जी का पुतला फूंका जाएगा और हम तमाम लोग गए और हमने पुतला फूंका। खैर हुआ साहब अब तय हो गया कि कल मीटिंग होगी और मीटिंग में जो है बाकी बातें तय होंगी और सारे कार्यक्रमों की रूपरेखा बनेगी। ओके हमारे घर के पास एक पंस होटल था उन दिनों हमारे तमाम जो राज्य थे तमाम गतिविधियां वहां बैठ के बहुत बैठके होती थी तो साहब अगले दिन हमने 5 बजे का समय वहां रख दिया। उस दिन साहब फिर हॉल भर गया। काफी लोग आ गए। शहर के गणमान्य लोग आ गए। कांग्रेस भी उसमें बहुत थे और हमारे ठेकेदार लोग भी थे उसमें और अन्य जो मजबूत लोग थे जो आर्थिक रूप से हमारी सहायता कर पाते ऐसे भी लोग थे ण् एक ने कहा क्या दिक्कत है टेंट मेरी ओर से तो उसने कहा साउंड मेरी ओर से किसी ने कहा हॉल मेरी ओर से कहा पोस्टर मेरी ओर से जो खर्चा होगा मेरी ओर से ऐसे ऐसे हो गया हमने करते हमने कहा मजा आ गया और हमने भी क्या किया हमने कहा लगे हाथ काम कर दिया जाए हमने वहीं से एक शगुन वेडिंग पॉइंट होता था तो हमने व से जो मालिक थे हमने कहा यार कर लेना कर हमने व से फोन घुमाया हमने कहा जी हमें चाहिए आठ तारीख प्रोग्राम करना है हमने नेगी जी का नाम नहीं बुलाया बताया तो हमने जो है बुक कर दिया अब बुक किया उसके बाद क्या है कि उन्होंने कहा जी कोई बात नहीं साहब क्या बात कर दी आपने अरे आप तो प्रोग्राम करते हैं बड़े सुंदर प्रोग्राम करते हैं और हमारा ये है आज दिवस का कार्यक्रम है तो क्यों नहीं कहा ठीक है ओके जी बुक हो गया होगा पक्का बुक हो गया मैंने कहा ठीक है ठीक है तो हमने फटाफट 5000 इकट्ठे किए और एक आदमी को भेजते कि रसीद ले आओ भैया ये कल ऐसा ना हो कि बोले नहीं जी 15 मना कर दे बुक कर दो आदमी गया उन्होंने कहा जी पैसे क्यों भेजे आपने हमने कहा नहीं आप रसीद काट जी ये तो कमेटी का खैर उन्होंने फटाफट रसीद भी दे दी हम खुशगुन हो गया अखबार में आ गए कि निगी जी की नाइट होगी और जो हैवस में होगी अब हैक्वंस में नहीं शून रीटिंग पेंट में होगी अब सब तय हो गया ठीक हो गया अब साहब दो दिन हो गए हम लोग तैयारी में लग गए लगातार वार्ता हमारी हो रही फोन से तो होते अब साहब दो दिन बाद क्या हुआ कि जो हॉल मालिक थे वो ढूंढने के आ गया कि अरे भारी जी हमें तो पता नहीं था ये तो 7 आठ 9 तक तो बुक है और नगर पालिका मसूरी ने इसको बुक कर रखा है और वहां पर जो है 9 तारीख के प्रोग्राम होने है और पालिका के है वो तो ऑलरेडी है और वेरी सॉरी हमने तो जो है गलती से बुक कर दिया प्लीज आप लीजिए और हमारे लीजिए हम समझ गए हमने उनसे ज्यादा बेस्ट नहीं अच्छी कह दिया है आप लीजिए फिर ये हुआ कि अब क्या क्या होगा क्या होगा क्या होगा तो साहब हमने क्या किया कि हमारे एक हमारा गढ़वाल टेरेस था तो बंद हो गया उस टाइम खुला था हमने कहा चलो अब हम मसूरी जी में गढ़वाल टेस्ट का छत बुक करते हैं तो साहब वहां हमारे एक मित्र थे कवि जी बहुत मानते थे हमारे हम लोग समाज में काम करते हैं संस्कृति के लिए काम करते हैं उसको बहुत मानते हैं तो उनको फोन लगाया साहब मैंने प्रेस क्लब में बैठे हुए थे ण् वहां से फोन लगाया कि कवि जी भाई हम लोग जो है राज्य आस्था कार्यक्रम करना चाहते हैं और हमें में ऐसा था 8 तारीख को वो आपका जी आप बात बुक को बुक कर दीजिए कि हां हां पक्का पक्का बुक आपका मैंने कहा ऐसा नहीं होगा जी अच्छा उन्होंने खुद ही हमें कहा कि भाई एक काम कीजिए आपकी कहा मामला है और आप रसीद काट दीजिए तो होगा क्या कि अगर बुकिंग आती है मैं कह दूंगा बुक है डन हमने कोई 2000 भेजा और रसीद ले ली हो गए साहब और हम आगे तैयारी में लग गए हम पोस्टर पर्चे ये प्रचार सब भागे हुए थे। ये कार्यक्रम होगा। खैर हुआ था। अब जो है हम तैयारी में थे तो फिर दो दिन बाद प्रेस क्लब में बैठा हुआ था मैं। हमारे कुछ साथी और भी थे। वो सज्जन बड़े मुंह लटकाए हुए आ गए और कहा कि कि भण्डारी जी वेरी सॉरी और मुझे दुख है ण् वो बहुत अंदर से टूटे हुए थे क्योंकि उन प्रेशर पड़ा होगा। उन्होंने कहा वेरी सॉरी अब हम टैरेस नहीं दे सकते उसकी ऋषिकेश से पहले की बुकिंग है । हमने कहा जी ओके जी। खैर हम एक एक चीज की खबर नेगी जी को बताते रहे कि कार्यक्रम करना इतना कठिन होता जा रहा है.                   

                  क्योंकि तब प्रदेश में और मसूरी में सरकार कांग्रेसियों की थीए पूरा दबाव ये बन गया कि कहीं भी इन आयोजकों को जगह ना दी जाए ण् अब हमने एक मीटिंग रखी कि चलो ठीक लेकिन जो तैयारी है जो टेंट है जो साउंड है जो अन्य व्यवस्थाएं हैं उसको जो लोगों ने कहा था वो लाओ भैया है और एडवांस में चाहिए सब ण् तो हमने मीटिंग कॉलए तो मीटिंग में पहले तो कोई आया नहीं फिर आए भी तो  चार पांच साथी ही आए ण् जिनमें पूरण जुयाल, आरपी बड़ोनीए आर.पी. बडोनी, रामकुमार कनौजिया आदि। वे लोग जिन्होंने व्यवस्थाएं के लिए कहा था कि मैं टेंट कर दूंगाए मैं साउंड कर दूंगाए मैं खाने की व्यवस्था कर दूंगाए मैं प्रचार की व्यवस्था कर दूंगा वो सब गायब ण्  हमने फोन उठाया और एक  सज्जन को फोन किया कि भाई सिंह जी आप आए नहीं हैए कहा कि नहीं मैं थोड़ी बिजी हूं। हमने कहा जी आपने वो कहा था कि हम व्यवस्था कर देंगे। भंडारी जी खबरदारए ऐसा है कि अगला प्रोग्राम दो लाख का होए पांच लाख का हो सब मेरी ओर से होगा। लेकिन इस प्रोग्राम में एक चीज नहींए एक सुई भर भी मैं आपकी मदद नहीं कर सकता। बिल्कुल नहीं कर सकता। सॉरी दूसरी को फोन लगाया सॉरी सॉरी जी हम इस प्रोग्राम में कुछ नहीं कर सकते। फिर सब ने मना कर दिया। स्वाभाविक है सभी पर  बहुत तगड़ा प्रेशर आ चुका था। कोई ठेकेदार हैए कोई होटल मालिक हैए कोई कुछ और । हम रह गए पांच सात लोगए अब क्या सब बड़े परेशान। हालांकि हमने ये तय कर लिया था कि हम प्रोग्राम तो करेंगे करेंगे। इस बीच की अफवाएं उड़ाई गई कि मसूरी से जो है पौड़ी नेगी जी को फोन किया गया कि अरे यार वो भण्डारी तो कहीं भाग गया है और तुम्हारा यहां कोई प्रोग्राम व्रोग्राम नहीं है भैया ण् तुम यहां मसूरी आने की मत सोचना .

      दिन बहुत कम रह गए थे ण्  तब मसूरी में निम्न स्तर की राजनीति भी हुई।  प्रदीप भण्डारी से  कहा कि भाई यार तुम तो टिहरी के हो और नेगी पौड़ी का है तुम कहां उसके चक्कर में पड़े हो ।

खैर उसके बाद मैं एक दो साथी लेकर लोग मसूरी में सर्वे ऑफ इंडिया के ऑफिस में गए ण् वहां बैठे तो वहां पर बहुत अच्छे ढंग से जो बाबू थे वो मिले और उनसे हमने बात बोली हमने कहा जी देखिए अब बात ये आ गई थी हमने कहा अब हम सच बोलेंगे अभी नहीं बोलेंगे कि भाई प्रोग्राम है और ऐसे वैसे हमने कहा हम गए हमने बाबू जी को बताया कि बाबू जी बात ऐसी ऐसी है ण् तो उन्होंने कहा भैया देखिए ऐसा है कि आप अच्छा काम कर रहे हैं और इस अच्छे काम में हम क्या बन सकता है हम सहयोग करेंगे आप ऐसे कीजिए आप अंदर जाइए साहब के पास साहब बैठे हुए हैं और उनसे कहिए और मुझे पूरा विश्वास है कि आपको काम हो जाएगा ण् हम अंदर गए एक बड़े साहब बैठे हुए थे कहना चाहूंगा कि वो गैर पहाड़ी थे और उन्होंने कहा कि भाई आप बहुत बड़ा काम कर रहे हैं अच्छा काम कर रहे हैंए अच्छे काम के लिए त्याग कर रहे हो मेहनत कर रहे हो है ना अपना संघर्ष कर रहे हो हम आपका साथ जरूर देंगे ण् हम आपको ग्राउंड दे देते हैं उसकी जो कुछ फीस ने कुछ फीस हमसे ली और एक हमें एग्रीमेंट बना के दे दिया। उसमें कोई 15 16 शर्तें थी कि होता ये है कि भाई हम तोड़फोड़ नहीं करेंगे। हम ये नहीं करेंगे हम वो नहीं करेंगे। जो भी उसके थे और उसमें लास्ट में एक पॉइंट था कि हम इस अनुमति को किसी भी समय अकारण निरस्त कर सकते हैंण् हमने पढ़ा मैंने कहा जी ये तो आपने फिर लिख दिया किस टाइम निरस्त कर सकते हैं। पता लगा आपने लास्ट टाइम मना कर दिया। उसने कहा भाई ये तो नियम है। हमने कहा क्या होगा साहब ऐसा मत कीजिए हमारा साथ दीजिए आप। तो सजन ने एक बात बोली अब वो कौन सजन थे मैं नहीं जानता नाम नहीं बोलना चाहूंगा वैसे भी उन्हें कहा देखिए भाई हम तो ये काम कर सकते हैं कि हम कानून के आगे बंधे हुए हैं ये एग्रीमेंट आपने साइन कर दिया हमने एग्रीमेंट दे नहीं सकते लेकिन यही हो सकता है कि अगर आप हम बाद ऐसा कोई हमारे ऊपर प्रेशर पड़ता है और हमें कैंसिल करना पड़ता है और हम आपको ढूंढते हैं और आप नहीं मिलते हैं आपको हम इसके जो निरस्तीकरण का पत्र आपको नहीं पहुंचा पाते हैं आपसे साइन नहीं करा पाते हैं तो वो निरस्त नहीं माना जाएगा। ये आप देख लीजिएगा। तो मैंने कहा चलिए साहब ठीक है। उन्होंने कहा वैसे हम जो है 100ः आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। ओके जी और मैं ये बात कहना भूल गया कि हमने जब प्रोग्राम तय किया था 8 नवंबर 2006 का तो सबसे पहले हमने मसूरी एसडीएम साहब को पत्र दे दिया था कि हम प्रोग्राम करने जा रहे हैं। 8 तारीख को उस नरेंद्र सिंह नेगी जी का प्रोग्राम होगा और हमें प्रोग्राम करने की अनुमति दी जाए। लेकिन साहब वो करीबन 14 दिन हो गए थे और हमें अनुमति नहीं मिली थी प्रोग्राम कीण्  मिलती भी कैसे .

                       वहां से हमें हिम्मत मिल गई ण् मगर फिर षडयंत्रकसरियों ने फिर षडयंत्र रचा और मसूरी में अफवाह उड़ायी गई कि नेगी जी ने मसूरी आनें से मना कर दिया कि नेगी जी ने तो कह दिया है कि मैं तो मसूरी नहीं आऊंगाए मैं क्यों ऐसे माहौल में आऊंगाए पिटने थोड़ी नहीं आऊंगा ण् उन दिनों ज्यादा फोन लैंडाइन फोन थे ण् मोबाइल हल्के फुल्के काम करते थे तो मुझे लगा कि क्या फोन पर बात हो नहीं पाई नेगी जी को कई फोन लगाए मगर फोन से वार्ता ही नहीं हो पायी । और अब कार्यक्रम हेतु मात्र पांच दिन  रहे होंगे ण् और सारी जिम्मेवारी मेरे पे आ चुकी है। मैं ही था। मैं डिसीजन चाहता तो प्रोग्राम हो जाता।

             अब मैं पहले उस बात आउं कि उससे पहले एक महत्वपूर्ण जानकारी पर आता हूॅ कि नेगी जी का साथ देने में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी भी पीछे हट गए। पता नहीं कि नेगी जी का साथ न देना आंदोलनकारियों को भी अब सरकार से प्रायोजित था। कहां से था क्या था मैं नहीं जानता। लेकिन उनको मसूरी के कुछ हमारे आन्दोलनकारियों ने कहा कि हम नरेंद्र सिंह नेगी को मसूरी नहीं आने देंगे। मैंने एक प्रोग्राम दिया था कि नेगी जी आएंगे और गांधीचैक पर  उनका स्वागत करेंगे और झुलाघर में आकर वे शहीदों को फूल चढ़ाएंगे और उसके बाद आगे प्रोग्राम देने जाएंगे सर्वे मैदान ण् एक दिन मसूरी एसएचओ का मुझे फोन आया कि प्रदीप भण्डारी बोल रहे हैं घ् मैंने कहा हां बोल रहा हूं ण् एसएचओ ने कहा कि आप मौसम में नेगी जी का प्रोग्राम कैसे कर रहे होण् मैंने ने जी क्या बात नेगी जी की कोई विदेशी है क्याण् एसएचओ ने कहा जो नेगी जी का प्रोग्राम है वह यहां पर मत कीजिएए आप पर कोई अनुमति नहीं है और दूसरी बात है कि जो आप शहीद स्थल पे जाने की बात कर रहे हैं वहां बिल्कुल आप नहीं जाएंगे उनको बिल्कुल लेके नहीं जाएंगे  । किसने प्रेशर मारा होगा उन पे पता नहीं पर अब मेरी खोपड़ी घूम जाती हैए और मैंने उनसे कहा मिस्टर एसएचओ सुन लीजिए ये राज्य बनाया है हमने राज्य है हमारा और आप हमारे नौकरशाह हैं और सुरक्षा करना आपकी ड्यूटी है ण् नेगी जी शहीद स्थल पर आने देने की कौन आदमी धमकी दे रहा है ण्  अरेस्ट कीजिए ऐसे आदमी को। बंद कीजिए ऐसे आदमी को .

            खैर, सर्वे ग्राउंड बुक हो गया सब कार्यक्रम तय हो गए। उसको लीड मैं ही कर रहा हूं। अब हुआ ये कि मैंने सोचा कि भाई मैं प्रोग्राम तो कर रहा हूं। मैं इतनी लड़ाई भी लोंगो से ले रहा हूॅ, कलाकारों से भी लड़ाई ले रहा हूं। सबका बुरा भी बन गया हूं। मेरे छोटे बच्चे भी हैं। कई बातें हैं। और कैसे मैं रहूंगाघ् मैं किराए घर में यहां पर रहता था। तो मैंने अगले दिन एक टैक्सी बुक की। और अपने दो छोटे बच्चे बेटी प्रेरणा  जो आठ 10 साल की और मेरा बेटा पीयूष से जो छ सात साल का भी रहा होगा और मेरी पत्नी श्रीमती कमलेश भंडारी हमने गाड़ी बुक की और ऋषिकेश होते हुए पौड़ी चली गए और नेगी जी फोन नहीं लगाए नेगी जी को कोई बात नहीं हुई और हम सुबह चले और सीधे 1रू00 बजे के आसपास नेगी जी के घर में पहुंच गए ।  पौड़ी में घर के अंदर नेगी जी एवं श्रीमती नेगी बैठे हुए थे । उस समय उनकी माता जी भी जिंदा थी। हमें देख वे तो चैंक गए, पूछा आप यहाॅ कैसे।  अरे मैंने कहा साहब कैसे आप ठीक ठाक हैघ् हां अरे हम तो ठीक ही हैं। लेकिन उनकी जो स्थितियां थी जो उस समय निराशा होती थी वो सब दिखती थी। मैंने कहा नेगी जी सुनिए। हमने उत्तराखंड राज्य आंदोलन की भांति इस आंदोलन में को तो कूदपड़े हैं और इतना बड़ा स्टेप उठा दिया है ण् और ये हमने ये भी बता दिया कि नेगी जी सारी जो हमारे पास वो थी अनुमतियां थी वो निरस्त हो चुकी है प्रोग्राम की समस्या भी है और ये सब है और उसके बाद वार्ता हो पाते नहीं हो पाते मालूम नहीं है हमारी आपने फोन वहां लगते नहीं है हमने सब तैयार तो कर दी है लेकिन ये सुना है कि आप वहां नहीं आ रहे हैं आपका तो प्रोग्राम ही नहीं है मसूरी का ण् लेकिन वे कहने लगे लगे कि प्रोग्राम नहीं आ रहे क्यों नहीं आ रहा हूॅ मैं तैयार बैठा हॅू पर  मुझे तो यह बात कही गई प्रदीप भंडारी मसूरी में है ही नहीं, वह तो भाग गया है । फिर हम सब समझे कि ये सब गलतफहमियां जानबूझ के पैदा की जा रही है ण् हमने कहा कि नेगी जी अब क्या होगाए अब देखिए हमने सर्वे ग्राउंड बुक किया है लेकिन जैसे अन्य निरस्त हो गई है वो भी निरस्त हो सकता है लास्ट टाइम पेण् फिर क्या होगा तो नेगी जी ने गहरी सांस लेकर कहा कि प्रदीप चाहे पीएससी लगे पुलिस लगे कर्फ्यू लगे कुछ भी हो जाए नरेंद्र सिंह की मसूरी पहुंचेगा कोई साथ दे ना दे कोई आए ना आए नरेंद्र सिंह की मसूरी पहुंचेगा और अगर मंच नहीं होगा स्टेज नहीं होगा कोई फ्रेंड नहीं मैं गले में हंरमोनियम डाल कर गीत गाऊंगा और मुझे कोई रोकने वाला नहीं है जब तक प्राण है मैं आऊंगा ण् नेगी जी के अंदर की जो ताकत थी जो गुस्सा था और जो एक दृढ़ निश्चय था हमने देखा तो हमें ये तो पक्का विश्वास हो गया कि नेगी जी तो आएंगे . 

         मसूरी आकर हमने एक पर्चा छापा और उस पर सारा प्रोग्राम छाप दिया । अब वह दिन भी आ गया ण् मगर  7 तारीख को फिर से फोन एकदम पूरी तरफ बंद हो गए ना नेगी जी का फोन लगा और ना मेरा फोन वहां हो पाया और दिन भर वहां मसूरी में ये बात फिर से आ गई शासन प्रशासन की ओर से भी बात आ गई कि नेगी जी का प्रोग्राम कैंसिल हो चुका है और वे मसूरी नहीं आ रहे ण् हमने कई बार नेगी जी को फोन लगाया मगर फोन नहीं लगा करीबन 8 बजे के आसपास मेरा फोन लग गया नेगी जी को। नेगी जी ने छूटते ही कहा कि अरे तुमने प्रोग्राम कैंसिल क्यों कर दियाघ् मैंने कहा साहब मैं कैंसिल क्यों करूंगाघ् हम तो यहां कह रहे हैं कि आप आ रहे हो नहीं आ रहे होघ् अरे मैं क्यों नहीं आऊंगाघ् तुमसे कहा था ना कि मैं तो आऊंगा ही आऊंगा। तुम्हारा प्रोग्राम पक्का है मैंने कहा जी बिल्कुल पक्का है हम यहां बैठे तो उन्होंने मुझे बताया कि सुनो अभी मेरे पास जो है डीएम भी आए थे एसएसपी आए थे पौड़ी के और उन्होंने कहा नेगी जी ठीक हालात ठीक नहीं है आप कल घर से बाहर मत निकलिए आप मसूरी मत जाइएण् मगर मैंने उनसे साफ कह दिया कि मेरी जनता ने बुलाया है और मुझे जनता से कोई खतरा नहीं है मैं जाऊंगा .

हमने जैसे ही फोन रखा तभी हमें ढूंढते ढूंढते सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी भी आ गए कर्मचारी भी आ गए और उन्होंने एक पत्र मुझे थमा दिया कि आपकी जो अनुमति है वो के अपरिहार्य कारणों से निरस्त हो गई है ।

        हम समझ गए और हमने भी प्रशासन को चेतावनी दे दी कि कार्यक्रम तो होगा, सड़कों में करेंगे या जेल में करेंगे लेकिन प्रोग्राम तो करेंगे ण् और उसी टाइम हम जो है मसूरी एसओ को चिट्ठी दे आए कि बहुत बड़ा अपमान हो रहा है जनता का अपमान हो रहा है और ये तानाशाही है अचानक का प्रोग्राम निरस्त करना ।  यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि कल सुबह मसूरी में किंगरेट में चक्का जाम होगा। अब साहब कल सुबह भी आ गया। यानी कि 8 नवंबर 2006 भी आ गई। फिर वही हाल प्रदीप भंडारी जी ने उस बिना दरी के पहुंच गया। कहां पहुंच गएघ् किंगरेट पे। अब साहब मैंने क्या किया कि है वहां तेरा मैं बिल्कुल 10रू00 बजे के आसपास हो गया। मैं गया और उस समय विक्रम सिंह रावत जी नेगी जी के मंच संचालक होते थे। टीसीज में जो अधिकारी थे और राजेंद्र सिंह रावत वो पहुंचे केवल दो आदमी वो सामने खड़े थे और मैं आया और तिराहे पर लंबा लेट गया ण् अब मैं लेटा तो फिर धीरे धीरे एक आया दो आया फिर तीन आया वैसे ही जैसे कि हमारे पास पहले कचहरी में आए थे उस ढंग से आए आते आते आते आते आते आते जो है पूरा ंिकक्रेग लोगों से भर गया ण् हजारों लोग आ गए पता नहीं कौन.कौन लोग आए कैसे.कैसे लोग आए पता नहीं हमें और वहां ढोल दमों, बाजा सब कुछ ण् अब साहब मंत्री द्वारा कहा गया कि कहीं नौछमी नारेणा नहीं बजेगा मगर साहब उस दिन सारी हदें टूट गई ण् हमारे स क्रान्तिकारी साथी आरण्पीण् बडोनी जी ने होटल वर्कर्स यूनियन की गाड़ी उठाई माइक उठाया और लगाया नौछमी नारेणा और पूरे शहर में घुमाया तथा किंगरेट नौछमी नारेणा गीत पर जमकर नृत्य हुआ ।  टायर फूंके गए पत्रकार साथियों ने लाइब टीवी पर न्यूज दिखायी ।  नौछमी नारेणा का मतलब उन दिनों कर्फ्यू तोड़ने के बराबर था ।

 जाम के कारण वहां किंक्रेग से लेकर लाइब्रेरी एकेडमीए नीचे से मसूरी झील तक जाम जाम ही जाम जाम ही जाम लग लोग बैठे हुए हैं। हजारों लोग बैठे हैं। वहां एसडीएम की गाड़ी आ गई। वहां पुलिस की गाड़ियों आ गई। पीएससी की गाड़ियां आ गई। वहां सब ने हमें चारों ओर से घेर लिया और हम बीच में बैठे बैठे रहे बैठे रहे। हम नारेबाजी करते रहे। उस दिन बहुत वीआईपी इधर मसूरी जी आए होंगे और कहीं के मंत्री रहे होंगे कुछ रहे होंगे उनका प्रेशर भी पहुंच गया तिवारी को कि भाई तुम कैसे मुख्यमंत्री है आपके जाम आए हमारे मंत्री जी फस गए अलग और अधिकारियों पर अलग डीएम पर एसएसपी प्रेस देन से सब परेशान एसडीएम जो है वहां पीछे लेडी थी एसडीएम थी तो वो पीछे खड़ी है ।  

             करीबन डेढ़ के आसपास जो है एक डेढ़ के आसपास एसडीएम ने मुझे मैसेज भेजा कि बात सुनोण् मैंने कहा जी जो बात सुननी नहीं है सुनानी है यहीं पे सुनाइए हम नहीं आएंगे मगर एसडीएम कार्यालय में तैनाद एक लोकल अधिकारी की बात का सम्मान करते हुए मैं गाड़ी में बैठी हुई एसडीएम के पास गया और उनसे मैंने कहा मैडम कहिएण्  उन्होंने कहा ये क्या कर दिया, ये देखिए इतना बड़ा जाम लग गया है बहुत प्रेशर हो गया है ये है सारे अधिकारी सारे सचिव जो है यहां आए हुए हैं सबका प्रेशर है अब जाम कर दिया आपने बताइए ये सब व्यवस्थाएं ठप हो गई है ये कैसे चलेगा सुबह 10 से और एक बज गया था ण् मैंने कहा जी ये जाम हमने नहीं लगाया इसकी जिम्मेदार आप है अगर आप हमें एक महीने पहले अनुमति दे देते तो ये सब नहीं होता और मुझे वहां उससे सर्वे के अधिकारियों ने ये भी बताया है कि ये जो एनओसी नरस्त हुई ये एसडीएम के कहने पे नष्ट हुई। आपने हमारी एनओसी नष्ट किए हैं लास्ट टाइम पे सर्वे ग्राउंड की इसलिए जो है ये तो बर्दाश्त से बाहर का है और इसकी जिम्मेदार आप है है। देखिए इसका समाधान कीजिए। मेरा समाधान तो एक ही था। एक ही है कि जो प्रोग्राम होना है आज शाम शाम का वो प्रोग्राम हो विधि हो ढंग से हो वहीं पर हो। कि कैसे संभव हैघ् संभव ही नहीं है। कैंसिल हो चुका है। मैं क्या करूंघ् मैंने कहा कि कैंसिल कैसे हो गईघ् कि वो तो सर्वे ग्राउंड के जो सर्वे के विभाग के जो अधिकारी है मेरठ में उन्होंने किसी ने कैंसिल कर दिया है। मैंने कहा जी वो तो आपके कहने पे कैंसिल हुआ है। वो कह रहे हैं कि आप एन ओ सी  नहीं दे रहे हैं उनको कि नहीं पर मैं क्या करूंघ् आप समझा करें समझा करें। मैंने कहा समझाने से क्या चलेगा जीघ् ये तो आप जाम रहेगा। अब तो आज रहेगा, कल रहे। पता नहीं कितने दिन चलेगा। ये नहीं खुलेगा। जाम आज नहीं खुलेगा। मैं वापस जाने लगा तो एसडीएम ने कहा कि कुछ तो रास्ता निकालो । मैंने कहा एक ही रास्ता है। मैंने कहा जी फोन लाइए। मैंने एसडीएम के फोन से खुद फोन लाया। मैंने कहा नंबर बताइए उनका नंबर लगाइए। सीधा सर्वे के जो भी होंगे इंचार्ज उनको लगा। देखिए जी मैडम एसडीएम साहब बोल रही है और जो सर्वे में जो प्रोग्राम होने वाला था उस प्रोग्राम के लिए मैडम कह रही है कि आप उनको आप अनुमति दे दीजिए प्रोग्राम करने की ण् उधर से अधिाकरी ने कहा कि अगर मैडम कह रही है तो क्या दिक्कत है हम दे देते हैं लीजिए मैडम से बात कीजिए मैडम बोलिए मैडम हां हां तो ठीक है ये अनुमति हो सकती है तो इनको दे दीजिए ये इनका प्रोग्राम हो जाएगा ये लोग थोड़ा सा यहां पर नाराज है तो इनका प्रोग्राम हो जाएगा कहा ओके हम देते हैं ण् तो उसी टाइम उनको फोन हुआ उसी टाइम मुझे फोन आया कि बधाई हो आपका जो है कार्यक्रम करने की अनुमति मिल गई है ण् साहब अनुमति मिलने की बात सुनकर वहां क्या जश्न हुआ होगा आप सोच सकते हैं ण् कुछ क्षण बाद फूलों से लदे हुए नेगी जी एवं श्रीमती नेगी वहाॅ पंहुच गए ।  नेगी जी बताया कि जाम के कारण वे करीबन 5 किलोमीटर आए ।नेगी जी सब का धन्यवाद है किया । उनके मन, मुख और चेहरे व वाणी से जनता के प्रति कृतज्ञता प्रकट हो रही थी । हम भी धन्य हुए। हमने ईश्वर धन्यवाद किया कि हम एक नेक कार्य में सफल हो पाए ।

आप साफ सोचिए कि उस जाल में खुलने में कम से कम तीन चार घंटे लग गए तो गाड़ियां सब कुछ जहां छोड़ दी और वहीं से किंगडसी जो है सारी फूल मालों को लेकर के ढोल लोगों को लेकर के नाचते हुए नाचते हुए ना हम लाइब्रेरी चौक जाने वाले थे कहां किंक्रेग से उतना लंबा लाइब्रेरी तक हजारों हजारों की भीड़ हजारों हजारों की भीड़ फिर वहां से हम गांधी चौक फिर गांधी चौक से जी नमस्कार यहां से फूल बरस रहे वहां से फूल बरस रहे मतलब ऐसा तो कभी किसी सांसद का किसी सीएम का किसी पीएम का भी स्वागत नहीं हुआ होगा जो नेगी जी के मौस की सड़क और क्या सब जानते हैं जो उन्होंने देखा होगा और सब करते करते हम फिर शहीद स्थल पर गए ण्जब शहीद स्त्र गए तो वहां से वो धमकी देने वाले सब लोग गायब थे ण्हम गए प्यार से वहां फूल चढ़ाए उसके आगे बढ़े पूरी रास्ते स्वागत हुआ अब साहब हम लोग जो है वहां पहुंचे सर्वे ग्राउंड से पहले हम लंदन में जा रहे थे तो साहब मुझे एक फोन आया जब डीएम साहब बात करें जी नमस्कार डीएम साहब जी हां जी चलिए बहुत बधाइयां और आपका जो आप चाह रहे थे एक प्रोग्राम करना चाह रहे थे पूर्ण पर तो चलिए बधाई आपका प्रोग्राम होने जा रहे हैं अनुमति आपको मिल गई है और अनुमति मिलने के बाद जो है आप प्रोग्राम कीजिए और नेगी जी को बधाई दीजिए और थोड़ा सा जो है नेगी जी से एक रिक्वेस्ट कर दीजिएगा हमारी ओर से कि देखिए ऐसा है कि आप सारे गाने गाइए लेकिन मंच पे नौछमी नारेणा गीत न गाएं तो अच्छा होगा । उनसे रिक्वेस्ट कर लीजिए। मैंने कहा नेगी जी खड़े हैं बात कर लीजिए। नेगी जी ने कहा हां डीएम साहब धन्यवाद डीएम साहब ऐसा था कि अगर आप हमारा कार्यक्रम जो है हम तो गीत गाते हैं। लोग संस्कृति गीत गाते हैं। अगर हमारा प्रोग्राम बड़े प्यार से शुरू में ही होने देते। इतनी सारी दिक्कतें ना होतीए इतनी हमारी अनुमति कैंसिल ना होती तो हम सारी बातें आपसे सुन लेकिन अब हम अपनी सुनेंगे और अपनी जनता की सुनेंगे और नौछमी एक बार नहीं पूरी रात भी गाना पड़ेगा ना तो जरूर गाया जाएगा ण् अब सोचिए जो पीएससी हमें पीटने आई थी जो पुलिस हमें पीटने आई थी वही कई गाड़ियां कई ट्रक वो सारे हमारे साथ लगे और सर्वे ग्राउंड में सर्वे ग्राउंड में ।

   अब आप सोचिए कि कैसा क्या जोश रहा होगा देखिए नवंबर में सर्दी हो जाती बहुत ठंड हो जाती है बहुत ठंडा था वहां पर अपने सर्वे ग्राउंड में बहुत ठंडा था तो उसी समय साहब और 6रू00 बजे रात पड़ जाती है तो उसी समय कैसे बिजली की व्यवस्था हुई, कैसे मंच बना कैसे क्या बनाए दरिया आई लोग नीचे ही बैठे और साहब बड़ा शानदार प्रोग्राम हुआ और पूरी पीएससी और पुलिस हमारे चारों ओर बैठी रही सुरक्षा के लिए हजारों लोग वहां बैठे रहे लोग नाचे गाए नौछमी नारेणा खूब गाया गया ।  और फिर उसी मंच से नेगी जी की मंच वापसी हुई ।

    ये नौछमी नारेणा संघर्ष यात्रा रही बहुत लम्बी हो चुकी है ण्लेकिन बहुत संक्षिप्त में मैंने बताया ये तो तीन घंटे की फिल्म बन सकती है ।

       अब यहाॅ एक जरूर कहना चाहूंगा दोस्तों कि सच की लड़ाई में हमेशा आगे रहना चाहिए। दोस्तों जब कभी भी कोई राज्य में गलत काम होगा उसको उजागर करता हुआ गीत आना चाहिए। लोक रचना धर्मियों को अपनी कलम गलत के खिलाफ और नैतिकता के पक्ष में चलानी चाहिए। लोक कलाकारों को गायकों कोए रचनाकारों को  सत्ता मुखी नहीं जनता मुखी होना चाहिए। उम्मीद करते हैं कि सरकार पर नकेल डालने वाले ऐसे गीत उत्तराखंड के गीत संसार के आसमान में उभरते रहेंगे। नमस्कार।

मैं प्रदीप भण्डारी ।

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