मसूरी । तो क्या अब मसूरी विधायक और मंत्री गणेश जोशी की भाजपा मसूरी से छुट्टी करने वाली है । देहरादून के पूर्व मेयर सुनील उनियाल ‘गामा’ की मसूरी विधानसभा में बढ़ती सक्रियता और जोशी के प्रति लोगों में निरन्तर बढ़ते रोष से तो कुछ कुछ ऐसा ही नज़र आ रहा है । सैन्यधाम का अभी तक उद्घाटन न हो पाना, बहुचर्चित एग्री मित्र उत्तराखण्ड 2025 के करोड़ों रूपए से आयोजित होने वाले कृषि मेले का अचानक निरस्त होना, मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल में पहली बार सीएम का न आना, सीएम तो छोड़े साहब कार्निवाल समिति के अध्यक्ष देहरादून डीएम सविन बंसल का न आना । कार्निवाल का बुरी तरह फलाप होना । अनेक कलाकारों की आज तक पेमेंट रोकना । ये सब यूंही हो रहा है या सरकार व पार्टी भी गणेश जोशी से दूरी बनाए रखने की अंदर खाते रणनीति बना चुकी है ? संकेत तो यही मिल रहे हैं।

आय से अधिक सम्पत्ति का आरोप , कृषि विभाग घोटाला आरोप, मसूरी यमुना पंपिंग योजना घोटाला आरोप समेत अनेक आरोपों से घिरे गणेश जोशी से इन दिनों उनकी घोषणाओं और कार्यों को लेकर जनता ने भी जवाब मांगना शूरू कर दिया है । हाल में एक पब्लिक कैम्प में जनता का उनसे सवालों का वीडियो खूब वायरल हुआ था । जिसमें गणेश जोशी जवाब देने के बजाय बगलें झांक रहे थे । भीषण थराली आपदा के पीड़ितों की सुध लेने एक बार भी वहां न पंहचने से आकोषित जनता द्वारा मंत्री गणेश जोशी का घेराव करना और उन्हें काले झण्डे दिखानें का वीडियो भी सोशियल मीडिया पर खूब वायरल हुआ ।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 16 सितम्बर को मसूरी विधानसभा में जगह जगह आयी भीषण आपदा से आपदा ग्रस्त अनेक लोगों की ढ़ेले भर की मदद न करने और झड़ीपानी आपदा के लिए ‘कोई मरा तो नहीं’ यह कहने वाले मंत्री गणेश जोशी प्रदेश के प्रसिद्व व विश्वविख्यात पर्यटन नगरी मसूरी के लिए शिव मंदिर के पास आवागमन के लिए इकलौता पुल 6 महीनें बाद भी स्थाही रूप से नहीं बना पाए । मसूरी में पटरी व्यवसायियों व शिफनकोर्ट निवासियों से झूठा आश्वासन हो, आईटीबीपी से कैम्पटी रोड़ तक सुरंग की बहुप्रचारित बात हो, आवास की समस्या से जूझ रहे मसूरी वासियों को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम का लाभ न दे पाने की बात हो । 14 वर्षों में मसूरी देहरादून आवागमन के लिए एक वैकल्पिक मार्ग न दे पाने की बात हो । करोड़ों के खर्चे के बाद किमाड़ी मार्ग न बनना । वर्षों से धसतें लंढौर बाजार का कोई समाधान न करवा पाना, सर्वे ऑफ इंडिया प्रॉपर्टी का कोई उपयोग न करवा पाना, लंढ़ौर में जाम का कोई हल न निकाल पाना, सेंटमेरी अस्पताल को बंद करवाना आदि इन सब प्रकरण से महसूस किया जा सकता है कि गणेश जोशी के प्रति जनता किस कदर नाराज है । इन सब बातों से न सिर्फ गणेश जोशी बल्कि भाजपा की छवि पर भी बुरा असर पड़ता नज़र आ रहा है ।
उधर लाखों की आबादी वाले देहरादून नगर निगम के चुनाव में 131906 वोट लेकर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा की यकायक पिछले कुछ समय से मसूरी में सक्रियता बढ़ गई है । मसूरी में उन्हें व्यापक जन समर्थन भी मिल रहा है। मसूरी विधानसभा में हर तरफ उनके पोस्टर बैनर लगे नज़र आ रहे हैं और लोगों में उनके नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जानकारों का मानना है कि यह सब ऐसे ही नहीं हो रहा है इसके पीछे पूर्ण तैयारी हो सकती है । मसूरी में कीर्तिनगर विकास खण्ड के लोगों की संख्या सर्वाधिक है और श्री गामा का मूल गाॅव कीर्तिनगर विकासखण्ड में ही, जिससे मैती लोगों का उन्हें बड़ा लाभ मिल सकता है। तो अब बातें उठनें लगी है कि ‘गामा चिंगारी’ की सक्रियता मसूरी में भाजपा की ओर से परिवर्तन के संकते हैं क्या । उल्लेखनीय है कि पार्टी की हरी झण्डी के बिना भाजपा में अपने सिटिंग विधायक के खिलाफ ऐसी सक्रियता किसी कार्यकर्ता के लिए संभव नहीं हो पाती है । यह सब देखकर राजनीतिक गणितज्ञ यह भविष्यवाणी करनें लगे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की ओर से गणेश जोशी का मसूरी से पत्ता कट जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। कुल मिलाकर निकट समय में ही देखने को मिलेगा कि मसूरी विधानसभा से गणेश जोशी का पत्ता काटने के लिए गामा की थमाली में धार होगी या नहीं?।

Share it

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *