उदयपुर राजस्थान/ मसूरी। यहाॅ उदयपुर राजस्थान में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक संस्थान की राष्ट्र स्तरीय बैठक में उत्तराखण्ड भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ट के प्रदेश संयोजक और संस्कृतिकर्मी राजेन्द्र रावत ने मजबूती से उत्तराखण्ड संस्कृति और कला जगत का पक्ष रखा । उनकी बात को सम्पूर्ण बोर्ड ने बहुत शांति और धैय से सुना । देखें वीडियो –

पंजाब के राज्यपाल और संस्थान के केन्द्रीय अधिकारियों के समक्ष बहुत ही शालीनता से श्री रावत ने उत्तराखण्ड का पक्ष रखते हुए बताया कि उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की स्थापना के 40 वर्षों में संस्थान के मानचित्र में उत्तराखण्ड की मूल और समृद्व संस्कृति का वह स्थान नहीं दिखायी दे रहा है जिसका वह हकदार है । उन्होंने उत्तराखण्ड के बहुआयामी जनजातीय क्षेत्र की संस्कृति के साथ साथ कुमांऊ और गढ़वाल की दुलर्भ संस्कृति का संस्थान के कार्यक्रमों में उचित प्रदर्शन का अभाव बताया । उन्होंने स्पष्ट किया कि कि अभी तक संस्थान की ओर से उत्तराखण्ड के सुदूर गाॅवों की विशेष महत्व रखने वाली मूल संस्कृति पर संस्थान की ओर से न ही कोई शोध हहुआ है और न उसे उचित मंच दिया गया है। यद्यपि उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कमी हमारी ओर से भी सही पर्याप्त स्तर पर बात न रखने की कमी भी हो सकती है ।
श्री रावत ने अपने अभिभाषण में प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाली विश्व की सबसे लम्बी हिमालयी यात्रा नंदादेवी राजजात और कुम्भ मेले का भी विस्तृत उल्लेख किया और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक संस्थान का इन उत्सवों में भागेदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध भी किया। श्री रावत ने वीर भड़ माधो सिंह, तीलू रौतेली जैसी अमर गाथाओं की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की वीर गाथाओं को भी संस्थान के कार्यक्रमों में शामिल करने हेतु चिवार किया जाय । श्री रावत के सुझावों को बोर्ड ने अपने प्रस्ताव बुक में अंकित किया।
उल्लेखनीय है कि उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत स्थापित एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना 1985 में पंजाब के पटियाला में हुई थी । यह जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और चंडीगढ़ की विविध लोक कलाओं, संगीत, नृत्य और शिल्पकला के संरक्षण, विकास और प्रसार के लिए समर्पित है। देश की विशाल एवं विभिन्न संस्कृतियों और कलाओं को विकसित करने और लोकप्रिय बनाने हेतु इस केन्द्र की स्थापना की गई थी, ताकि कला के विभिन्न स्वरूपों को सामूहिक प्रयास द्वारा भारत की सांस्कृतिक विरासत के रूप में देशभर में एक मिश्रित पहचान दी जा सके। इस संस्थान का भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय ही मुख्य संचालक है जिसके सहयोग एवं दिशा-निर्देशानुसार यह केन्द्र कार्य करता है। इस केन्द्र की शासकीय सभा के अध्यक्ष पंजाब के राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया हैं तथा केन्द्रीय निदेशक एम फुरकान खान हैं।

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