दिल्ली/ मसूरी । पहले तो यह कि अनुज गुप्ता ने कांग्रेस से इस्तीफा ही कब दिया था, यह स्वयं इस सम्पादक के लिए पहेली बना हुआ, किसी को पता हो तो जरूर बताएगा । तथा दूसरा यह कि सूत्रों की मानें तो आज दिल्ली में जितने भी नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं वे सभी टिकट की गारण्टी पर कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं।
अब सवाल आता है कि अगर कांग्रेस इन पैराशूट नेताओं (पैराशूट व्यक्ति केवल बाहर से लाया हुआ ही नहीं माना जाता है बल्कि जो उस पार्टी के लिए कार्य ही न कर रहा हो और उसे ज्वांइन कराकर तुरन्त टिकट दिया जाय तो वह भी पैराशूट की ही श्रेणी में आता है) को विधायकी का टिकट देती है तो जमीनी नेता जो कांग्रेस के भगोड़े नेता नहीं हैं, कई वर्षों से जमीनी कार्यकर्ता हैं तथा विधायक बनने का सपना देखकर लगातार क्षेत्र में पोस्टर बैनर लगा रहे हैं, जनता से संवाद बनाए हैं और निरन्तर सक्रिय हैं उनका क्या होगा ।
अगर मसूरी विधानसभा की बात की जाए तो यहाॅ कांग्रेस से विधायकी का टिकट पाने की आस को लेकर मालसी वार्ड नम्बर 1 से दूसरी बार के पार्षद सुमेन्द्र सुशांत बोहरा, कांगेस नेत्री गोदावरी थापली, सोनिया आनन्द रावत तथा उपेन्द्र थापली की प्रमुख दावेदारी मानी जा रही है ।
मगर फिर भी महिला उम्मीदवारों की अनदेखी कर युवाओं को टिकट देने की बात भी की जाय तो अनुज गुप्ता से ज्यादा मजबूत हक तो पार्षद सुशांत बोहरा का नज़र आता है । क्योंकि श्री बोहरा न सिर्फ कांग्रेस के वफादार सिपाही हैं, यूथ कांग्रेस के प्रदेश सचिव रहे हैं बल्कि उन्होंने मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष के वोट के बराबर वाले मालसी वार्ड से लगातार दो बार पार्षद का चुनाव जीतकर कांगेस की झोली को मजबूत किया है। और निरन्तर विधानसभा में सक्रिय हैं ।
उधर गत चुनावों में अप्रत्यक्ष रूप से मसूरी पालिका अध्यक्ष का चुनाव हारे अनुज गुप्ता ने मौकापरस्ती के चलते पार्टी लाइन को तोड़ते हुए वर्ष 2018 में कांग्रेस पार्टी के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था । तथा गत विधानसभा चुनाव व पालिका चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी से दूर रहे । अगर वे उस समय भी कांग्रेस में वापस आ जाते तो तब शायद नतीजा भी कुछ और हो सकता था और उनकी विधायकी का दावा भी ज्यादा पवित्र होता ।
खैर अब देखना होगा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार को टिकट देकर सीट जितना चाहती है या फिर विपक्षी दल को वाॅकआवर देती है ।
