मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा के खेतलसंडा स्थित सीएसडी कैंटीन में सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्वर्गीय सूबेदार शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लगभग 715.51 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीएसडी कैंटीन तथा 162.26 लाख रुपये की लागत से बने सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण किया, जिससे क्षेत्र के पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने पिता स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी एवं अन्य शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और वीर सैनिकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने 60 वीर नारियों और 80 वीर सैनिकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में उनका योगदान अमूल्य है और समाज को उनके त्याग और बलिदान को सदैव याद रखना चाहिए।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि यह दिन उनके जीवन का अत्यंत संवेदनशील क्षण है, क्योंकि यह आयोजन उनके पिता की पुण्य स्मृति में हो रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता के सिद्धांत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा अपनी वर्दी का सम्मान करते थे और उनसे उन्होंने सीखा कि एक सैनिक के लिए उसकी वर्दी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि उसकी पहचान, सम्मान और जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनके पिता ने उन्हें यह शिक्षा दी कि राजनीति केवल पद प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने अपने पिता की सैन्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 28 वर्षों तक महार रेजिमेंट में सेवा दी और 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों के साथ-साथ ऑपरेशन ब्लूस्टार और ऑपरेशन रक्षक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बचपन में पिता से सुनी वीर सैनिकों की कहानियों ने उनके मन में देशभक्ति की भावना को मजबूत किया। भले ही वे स्वयं सेना में नहीं जा सके, लेकिन सैनिकों को अपना आदर्श मानते हुए वे आज भी राष्ट्र सेवा में समर्पित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2014-15 में जहां रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, वहीं यह बढ़कर 2024-25 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये हो गया है और भारत आज 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है, जो देश की बढ़ती सामरिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार सैनिकों, शहीदों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। शहीदों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि की गई है, साथ ही आश्रितों को सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने बताया कि परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों के लिए दी जाने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा मिलेगी। राज्य सरकार ने बलिदानियों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी हेतु आवेदन की समय सीमा को 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया है, जिससे अधिक से अधिक परिवार इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी सैनिकों के सम्मान को समाज का कर्तव्य बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में भी सैनिकों के हित में योजनाएं लागू करती रहेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की माताजी विशना देवी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता धामी भी उपस्थित रहीं। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। यह आयोजन शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ समाज में देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने का एक प्रेरणादायक प्रयास साबित हुआ।
