मसूरी । ‘तो क्या रजत अग्रवाल मसूरी व्यापार संघ का निरन्तर 20 साल अध्यक्ष बनें रहने का रिकार्ड बना पाएंगे या फिर सुनील सोनकर की ललकार इस सपने को धड़ाम कर देंगी’ यह चर्चा आजकल मसूरी की वादियों में जगह जगह तैर रही है । लगभग दो दशक से श्री अग्रवाल एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में मसूरी ट्रेडर्स एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव मैदान में उतरे हैं । कई बार कुछ प्रतिद्वंदियों ने उनके खिलाफ पर्चा भरा मगर रजत अग्रवाल का पलड़ा न सिर्फ भारी रहा बल्कि यह कहना उचित है कि पलड़ा इकतरफा रहा है । हरबार दो साल बाद होने वाले मसूरी ट्रेडर्स एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव में श्री अग्रवाल की लोक स्वीकार्यता के कारण जल्दी से कोई प्रतिद्वंदी उनके खिलाफ पर्चा भरने की हिम्मत नहीं कर पाता ।
मगर इस बार एक सशख्त प्रत्याशी ने उन्हें जर्बदस्त चैलेज भेजा है और वह प्रतिद्वंदी हैं सुनील सोनकर । व्यापारी के साथ साथ प्रतिष्ठित पत्रकार के रूप में शहर में स्थापित श्री सोनकर का भी नगर में खासा प्रभाव है । यह अलग बात है कि यह असर व्यापारियों के वोट पर कितना प्रभाव डालता है, क्योंकि रजत अग्रवाल का व्यापारियों से बहुत पुराना और गहरा नाता है । इस बात में भी कोई शक नहीं है कि श्री अग्रवाल और उनकी टीम ने मसूरी ट्रेडर्स एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन रूपी वृक्ष को सींचने में खूब पसीना बहाया है । मगर जिस प्रकार श्री सोनकर के नांमाकन में लोगों का समर्थन मिला और जिस गर्मजोशी से उन्होंने नामांकन किया उससे चुनाव दिलचस्प हो गए हैं । साथ ही श्री अग्रवाल ने अपना पूराना पैनल उतारा है वहीं श्री सोनकर ने एक बिल्कुल नया पैनल तैयार किया है, उनके पैनल में बहुत सौम्य और वरिष्ठ व्यापारी सुरेश गोयल की भी मजबूत उपस्थिति है । इंतजार रहेगा 27 मार्च का जब मसूरी व्यापार संघ के नतीजे आएंगे । यहाॅ यह कहना भी उचित होगा कि कुछ लोग कह सकते हैं कि ये चुनाव एक संस्था के हैं तो समाचार माध्यमों में इतनी सरगर्मी क्यों ? मगर राजनीतिक पंडित जानते हैं कि इस बार का मसूरी ट्रेडर्स एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष का चुनाव सिर्फ व्यापार संघ के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि रजत अग्रवाल व सुनील सोनकर दोनों की बहुत कुछ भवष्यि की राजनीति पर भी असर डालेगा ।

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